Moody’s ने भारत की रेटिंग बरकरार रखी, कहा-ग्लोबल आर्थिक संकट का भारत की रिकवरी पर असर नहीं

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India Growth: Moody’s भारत के आर्थिक रिकवरी पर ग्लोबल अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ी रही चुनौतियों, ऊंची महंगाई दर और वित्तीय स्थिति तंग होने का असर नहीं पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बरकरार रखते हुए यह बात कही. मूडीज के मुताबिक भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 7.6 फीसदी रहेगी जबकि पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में यह 8.7 फीसदी थी. वहीं 2023-24 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 6.3 फीसदी रहने की संभावना जतायी गयी है.

भारत की Baa3 रेटिंग बरकरार- मूडीज
रेटिंग एजेंसी ने भारत को बीएए3 रेटिंग दी हुई है जो निम्न निवेश स्तर की रेटिंग है. पिछले साल अक्टूबर में रेटिंग को नकारात्मक से स्थिर किया था. मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत की साख की स्थिति समेत उच्च वृद्धि क्षमता के साथ बड़ी और विविध अर्थव्यवस्था, बाहरी मोर्चे पर अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति और सरकार के कर्ज के लिये स्थिर घरेलू फंडिंग का बेस उसकी मजबूती को बताता है. 

भारत के लिए जोखिम कम-मूडीज
रेटिंग एजेंसी ने कहा, हमें नहीं लगता कि रूस-यूक्रेन युद्ध, उच्च महंगाई दर और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत दरों में वृद्धि समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये बढ़ती चुनौतियां वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में भारत में जारी रिकवरी पर प्रतिकूल असर डालेंगी. मूडीज के मुताबिक स्थिर परिदृश्य उसके इस विचार को बताता है कि अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली के बीच नकारात्मक प्रतिक्रिया से जो जोखिम है, वह कम हुआ है.

सरकार का राजकोषीय घाटा कम होगा-मूडीज की उम्मीद
मूडीज ने कहा, “हालांकि उच्च कर्ज बोझ और कर्ज लेने की क्षमता के कमजोर होने को लेकर जोखिम है. लेकिन हमारा अनुमान है कि जो आर्थिक परिवेश है, उससे सरकार (केंद्र और राज्य सरकारों) का राजकोषीय घाटा अगले कुछ साल में धीरे-धीरे कम होगा. इससे सरकारी साख में कमी की गुंजाइश कम है.” उसने कहा, “पर्याप्त पूंजी की स्थिति के साथ बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को लेकर पहले की तुलना में जोखिम कम हुए हैं. इससे पुनरुद्धार को गति मिली है.”

मूडीज आगे चलकर बढ़ा सकता है भारत की रेटिंग
मूडीज ने कहा कि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन के समर्थन से अगर भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावना अपेक्षा के विपरीत उल्लेखनीय रूप से बढ़ती है तो वह रेटिंग को को बढ़ा सकता है. आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन से निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ा है. मूडीज ने कहा कि राजकोषीय नीति उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से अगर सरकार का कर्ज बोझ कम होता है और ऋण लेने की क्षमता में सुधार आता है, उससे भी साख की स्थिति बेहतर होगी. हालांकि, कमजोर आर्थिक स्थिति या वित्तीय क्षेत्र में जोखिम बढ़ने से रेटिंग के नीचे जाने का जोखिम है.

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