यूपी की 18 ओबीसी जातियां एससी में हो सकती हैं शामिल?

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Yogi Adityanath UP Government Mission 2024: ओबीसी-एससी (OBC-SC) वोटों की राजनीति से सत्ता के केंद्र में छाने वाली राजनीतिक पार्टियां साल 2024 के लिए भी इन जातियों को खुश करने की तैयारी में हैं. ताजा मामला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का है. इस सूबे की सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) सरकार अब 18 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने का मन बना रही है.

माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार अगले मानसून सत्र (Monsoon Session) में विधानसभा के दोनों सदनों से प्रस्ताव पास कर इसे केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी में है. इसे साल 2024 के लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Election 2024) को कैश कराने का जरिया माना जा रहा है. बीते 17 साल से यूपी में ये मुद्दा खासा चर्चा का विषय रहा है.

ओबीसी-एससी वोट बैंक पर नजर

गौरतलब है कि यूपी में ओबीसी आबादी के 13 फीसदी वोट हैं. इन जातियों की वजह से 50 से अधिक विधानसभा सीटों की हार-जीत तय होती है. देश के सबसे बड़े सूबे में ओबीसी की इन्हीं 18 जातियों के वोट पर बीते 17 साल से राजनीतिक पार्टियां नजर गड़ाएं बैठी हैं. 17 साल से इन्हें एससी में शामिल करवाने की लड़ाई जोर-शोर से चल रही है. यूपी में OBC की 18 जातियों की लगभग 13 फीसदी वोट पर हर राजनीतिक पार्टी की नजर है. इसी वोट बैंक के लिए पिछले 17 सालों के इन्हें SC कैटेगरी में शामिल करवाने की लड़ाई लड़ी जी रहा है.

यूपी में बीजेपी खेल सकती है उत्तराखंड जैसा दांव

इस मामले में कानूनी लड़ाई को अमलीजामा पहनाने वाले दलित-शोषित वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष संतराम प्रजापति के मुताबिक उत्तराखंड में शिल्पकार जाति को अनुसूचित जाति (SC) के तहत लाया गया है. इस बदलाव के लिए उस वक्त की उत्तराखंड (Uttrakhand) सरकार ने 16 दिसंबर, 2013 को अनुसूचित संविधान आदेश 1950 को ही री-सर्कुलेट किया था. इस जाति में  केवट समूह भी आता है. इस पहाड़ी राज्य में इसी आधार पर जाति प्रमाणपत्र बन रहे हैं.

यूपी की बीजेपी सरकार के लिए इसमें सबसे सरल ऑप्शन है कि वो आदेश-1950 का अनुपालन करवाने के लिए स्पष्टीकरण के साथ अधिसूचना जारी कर दे. नए तौर पर जातियों को अनुसूचित करने जैसे लफ्जों का इस्तेमाल न किया जाए. इन्हें ही मूल जाति मानकर अनुसूचित जाति में शामिल किया जा सकता है.

संसद को भेज सकती है यूपी सरकार प्रस्ताव

ये भी कहा जा रहा है कि यूपी सरकार विधानसभा के आने वाले मानसून सत्र में इन जातियों को एससी की तरह आरक्षण देने का प्रस्ताव पास कर सकती है. इसके बाद इसे  संसद के दोनों सदनों से पास कराने के लिए केंद्र सरकार को भेज सकती है. इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त भी इसमें अहम रोल अदा कर सकते हैं. इनके द्वारा मझवार और भर की जातियों की परिभाषा सही तरीके देकर सभी राज्यों को उनकी सभी उपजातियों को एससी के दायरे में शामिल करने के लिए अधिसूचित कर दिया जाए. गौरतलब है कि  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में ये जातियां पहले से ही अनुसूचित जाति में आती हैं.

अदालत को शपथ पत्र नहीं सौंपना है रणनीति

यूपी की बीजेपी सरकार (BJP Government) इन दोनों बातों पर ही सोच-विचार कर रही है. यही वजह है कि सरकार ने अब तक इस मामले में उच्च न्यायाल में काउंटर एफिडेविट (Counter Affidavit) नहीं दिया है ये सब नोटिफिकेशन रद्द करने के लिए सरकार की रणनीति है. इससे वह कानूनी कार्रवाई में आने वाली किसी भी बाधा से पार कर सकती है. ये मामला अगर अदालत (Court) में लंबित हो जाता है तो तब सरकार को इसके लिए प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है. सरकार साल 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए इस मामले को पहले ही हल कर लेना चाहती है. 

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